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Samastipur Crime News: शाहपुर गोलीकांड के एक सप्ताह बाद भी गिरफ्तारी नहीं, पुलिस पर उठ रहे सवाल

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Alam Ki Khabar: समस्तीपुर के रोसड़ा थाना क्षेत्र के शाहपुर में सम्राट सौरभ को गोली मारने के मामले में एक सप्ताह बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। पीड़ित परिवार ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा और जल्द कार्रवाई की मांग की है।

समस्तीपुर। आलम की खबर:रोसड़ा थाना क्षेत्र के शाहपुर गांव में सम्राट सौरभ को गोली मारकर घायल किए जाने की सनसनीखेज घटना को एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक पुलिस किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार में भय और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर दिनदहाड़े हुई इस वारदात के बावजूद पुलिस अब तक किसी ठोस नतीजे तक क्यों नहीं पहुंच सकी।

घायल सम्राट सौरभ का इलाज जारी है। पुलिस ने घटना के बाद एफएसएल और डीआईयू टीम से जांच कराई थी तथा वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की बात कही थी। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के नेतृत्व में जांच शुरू होने और छापेमारी का दावा भी किया गया था, लेकिन सात दिन गुजर जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं।

सम्राट सौरभ के पिता समाजसेवी, ग्रामीण चिकित्सक एवं पत्रकार मणिकांत राय का कहना है कि उनका परिवार लगातार अपराधियों के निशाने पर है। उनके अनुसार यह कोई पहली घटना नहीं है। 21 मार्च 2026 को भी सम्राट सौरभ पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें रोसड़ा थाना कांड संख्या 184/26 दर्ज किया गया था। इसके बाद 24 मई 2026 को उनके बड़े पुत्र एवं ग्रामीण चिकित्सक सम्राट सचिन पर शाहपुर बजरंगबली मंदिर के समीप हमला किया गया, जिसका मामला रोसड़ा थाना कांड संख्या 205/26 के रूप में दर्ज है। अब तीसरी बार परिवार पर हमला होने के बाद भी आरोपित खुलेआम घूम रहे हैं।

परिवार का आरोप है कि यदि पहले दर्ज मामलों में समय पर प्रभावी कार्रवाई होती और आरोपितों को जेल भेजा जाता, तो शायद तीसरी घटना नहीं होती। लगातार हो रहे हमलों ने पूरे परिवार को असुरक्षा के माहौल में जीने के लिए मजबूर कर दिया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार एक ही परिवार पर हमले होना गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने पुलिस प्रशासन से जल्द से जल्द आरोपितों की गिरफ्तारी, परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा पूरे मामले का खुलासा करने की मांग की है।

घटना के बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया था कि सम्राट सौरभ के हाथ में गोली लगी है और एफएसएल एवं डीआईयू टीम को जांच में लगाया गया है। पुलिस ने सभी पहलुओं पर जांच तथा आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी का दावा किया था। हालांकि एक सप्ताह बीतने के बाद भी किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अब लोगों की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जल्द आरोपित गिरफ्तार नहीं होते हैं तो कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल और तेज हो सकते हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय के साथ-साथ सुरक्षा की भी आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

न्याय में देरी, भरोसे पर चोट

समस्तीपुर के शाहपुर में सम्राट सौरभ गोलीकांड को एक सप्ताह बीत जाना और अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि पीड़ित परिवार का दावा है कि इसी परिवार पर पहले भी दो बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। यदि पहले दर्ज मामलों में समय पर प्रभावी कार्रवाई हुई होती, तो संभव है कि ऐसी घटना दोबारा न होती। हालांकि इस दावे की जांच और सत्यापन पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन लगातार हमलों की पृष्ठभूमि इस मामले को और गंभीर बना देती है।

पुलिस ने घटना के तुरंत बाद एफएसएल और डीआईयू टीम की जांच, वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने और छापेमारी की बात कही थी। यह सकारात्मक पहल है, लेकिन आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि जब घटना को सात दिन से अधिक हो चुके हैं, तब तक परिणाम क्या है? अपराधियों की गिरफ्तारी और मामले में ठोस प्रगति ही जांच की वास्तविक सफलता मानी जाएगी।

कानून का डर तभी कायम रहता है जब अपराध के बाद त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई दिखाई दे। यदि आरोपी लंबे समय तक खुलेआम घूमते रहें, तो इससे पीड़ित परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। ऐसे मामलों में केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं होता, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक होती है।

अब जरूरत है कि पुलिस इस मामले की जांच को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द आरोपितों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाए। साथ ही, पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना भय के अपना जीवन जी सकें। न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि समय पर होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए। यही कानून के राज और जनता के विश्वास की सबसे बड़ी कसौटी है।

विशेष टिप्पणी

शाहपुर गोलीकांड अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि पुलिस की जांच की गति पर भी सवाल खड़े कर रहा है। यदि एक ही परिवार पर लगातार तीन गंभीर हमलों के बाद भी आरोपित कानून की पकड़ से बाहर हैं, तो स्वाभाविक रूप से लोगों का भरोसा प्रभावित होता है। जांच निष्पक्ष और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए, लेकिन साथ ही पीड़ित परिवार की सुरक्षा और आरोपितों तक शीघ्र पहुंचना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में इस मामले की प्रगति ही तय करेगी कि पीड़ित परिवार को न्याय कितनी जल्दी मिल पाता है।

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